हमसफ़र

​डूबना चाहती हूँ मैं फिर से तेरी आँखों के समंदर में... खोना चाहती हूँ तेरी दुनिया में... जहाँ मिलता मुझे सुकून... तेरी बाहों का वो जादू  जो कभी ना मिट सके... नज़रों के सफ़र में है तू ही मेरी मंज़िल... देखना चाहती हूँ मैं... तुझे एक बार और... पूछना चाहती हूँ मैं एक बार... "क्या … Continue reading हमसफ़र